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MUDRA BANKING EVAM LOK VIT (मुद्रा बैंकिंग एवं लोक वित्त)

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MUDRA BANKING EVAM LOK VIT (मुद्रा बैंकिंग एवं लोक वित्त) By- Dr. T.T Sethi,  ISBN:-978-93-89918-34-2

इस पुस्तक की विषय सूची इस प्रकार है-
प्रथम खण्ड: मूल अवधारणाएँ
1. मुद्रा की परिभाषा एवं कार्य 2. मुद्रा का वर्गीकरण 3. मुद्रा का महत्त्व 4. मुद्रामान 5. ग्रेशम का नियम 6. पत्र-मुद्रामान
द्वितीय खण्ड: मुद्रा का मूल्य तथा मुद्रा-स्फीति
7. मुद्रा की पूर्ति एवं माँग 8. मुद्रा-मूल्य की माप-निर्देशांक 9. मुद्रा परिमाण सिद्धान्त-नकद-भुगतान तथा नकद-शेष दृष्टिकोण 10. मुद्रा-मूल्य का आय सिद्धान्त अथवा बचत एवं निवेश सिद्धान्त 11. मुद्रा-स्फीति, अवस्फीति एवं संस्फीति 12. मुद्रा-स्फीति के सैद्धान्तिक आधार
तृतीय खण्ड: वाणिज्यिक बैंकिंग
13. बैंक-उनके कार्य तथा विविध रूप 14. साख एवं साख-निर्माण 15. बैंक की कार्य-प्रणाली तथा स्थिति-विवरण 16. भारत में वाणिज्यिक बैंकिंग का विकास 17. भारत में वाणिज्यिक बैंकिंग की गतिविधियाँ 18. बैंकिंग व्यवस्था में सुधार
चतुर्थ खण्ड: केन्द्रीय बैंकिंग
19. केन्द्रीय बैंकिंग 20. साख-नियन्त्रण की रीतियाँ 21. भारतीय रिजर्व बैंक 22. भारतीय रिजर्व बैंक की साख-नियन्त्रण नीति 23. मौद्रिक नीति
पंचम् खण्ड: मुद्रा-बाजार
24. भारतीय मुद्रा-बाजार 25. वित्तीय संस्थाएँ
लोक-वित्त की प्रकृति तथा क्षेत्र
1. लोक-वित्त: अर्थ एवं सिद्धान्त
लोक-व्यय
2. लोक-व्यय की प्रकृति एवं सिद्धान्त
करारोपण
3. राजस्व के विभिन्न साधन 4. करारोपण के सिद्धान्त एवं समस्याएँ
सार्वजनिक ऋण तथा वित्तीय प्रशासन
5. सार्वजनिक ऋण 6. बजट

Description

MUDRA BANKING EVAM LOK VIT (मुद्रा बैंकिंग एवं लोक वित्त) By- Dr. T.T Sethi,  ISBN:-978-93-89918-34-2

इस पुस्तक की विषय सूची इस प्रकार है-
प्रथम खण्ड: मूल अवधारणाएँ
1. मुद्रा की परिभाषा एवं कार्य 2. मुद्रा का वर्गीकरण 3. मुद्रा का महत्त्व 4. मुद्रामान 5. ग्रेशम का नियम 6. पत्र-मुद्रामान
द्वितीय खण्ड: मुद्रा का मूल्य तथा मुद्रा-स्फीति
7. मुद्रा की पूर्ति एवं माँग 8. मुद्रा-मूल्य की माप-निर्देशांक 9. मुद्रा परिमाण सिद्धान्त-नकद-भुगतान तथा नकद-शेष दृष्टिकोण 10. मुद्रा-मूल्य का आय सिद्धान्त अथवा बचत एवं निवेश सिद्धान्त 11. मुद्रा-स्फीति, अवस्फीति एवं संस्फीति 12. मुद्रा-स्फीति के सैद्धान्तिक आधार
तृतीय खण्ड: वाणिज्यिक बैंकिंग
13. बैंक-उनके कार्य तथा विविध रूप 14. साख एवं साख-निर्माण 15. बैंक की कार्य-प्रणाली तथा स्थिति-विवरण 16. भारत में वाणिज्यिक बैंकिंग का विकास 17. भारत में वाणिज्यिक बैंकिंग की गतिविधियाँ 18. बैंकिंग व्यवस्था में सुधार
चतुर्थ खण्ड: केन्द्रीय बैंकिंग
19. केन्द्रीय बैंकिंग 20. साख-नियन्त्रण की रीतियाँ 21. भारतीय रिजर्व बैंक 22. भारतीय रिजर्व बैंक की साख-नियन्त्रण नीति 23. मौद्रिक नीति
पंचम् खण्ड: मुद्रा-बाजार
24. भारतीय मुद्रा-बाजार 25. वित्तीय संस्थाएँ
लोक-वित्त की प्रकृति तथा क्षेत्र
1. लोक-वित्त: अर्थ एवं सिद्धान्त
लोक-व्यय
2. लोक-व्यय की प्रकृति एवं सिद्धान्त
करारोपण
3. राजस्व के विभिन्न साधन 4. करारोपण के सिद्धान्त एवं समस्याएँ
सार्वजनिक ऋण तथा वित्तीय प्रशासन
5. सार्वजनिक ऋण 6. बजट

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