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आधुनिक भारतीय राजनीतिक चिन्तन-Adhunik Bhartiya Rajnitik Chintan – (TEXT BOOK)- By Dr. V.P. Varma

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Adhunik Bhartiya Rajnitik Chintan- , By – Dr. V.P. Verma, ISBN Code – 978-93-86828-29-3

 

इस पुस्तक की विषय सूची इस प्रकार है-

भाग 1. भारत में पुनर्जागरण
1. ऐतिहासिक और विचारानुगत पृष्ठभूमि 2. भारत में पुनर्जागरण, राष्ट्रवाद और राजशास्त्रात्मक चिन्तन 3. भारतीय स्वातन्त्रय आन्दोलन 4. ब्रह्म समाज 5. दयानन्द सरस्वती 6. एनी बेसेन्ट तथा थियोसोफी 7. रवीन्द्रनाथ ठाकुर 8. स्वामी विवेकानन्द तथा स्वामी रामतीर्थ

भाग 2. भारतीय मितवादी तथा अतिवादी (उग्रतावादी)
9. दादाभाई नौरोबी 10. महादेव गोविन्द रानाडे 11. फिरोजशाह मेहता तथा सुरेन्द्रनाथ बनर्जी 12. गोपालकृष्ण गोखले 13. बाल गंगाधर तिलक 14. तिलक का गीता-रहस्य 15. विपिनचन्द्र पाल तथा लाला लाजपत राय 16. श्री अरविन्द

भाग 3. महात्मा मोहनदास करमचन्द गाँधी
17. महात्मा मोहनदास करमचन्द गाँधी

भाग 4. आधुनिक भारत में धर्म तथा राजनीति
18. हिन्दू पुनरुत्थानवाद तथा दार्शनिक आदर्शवाद 19. मुस्लिम राजनीतिक चिन्तन 20. मुहम्मद इकबाल

भाग 5. अर्वाचीन भारतीय राजनीतिक चिन्तन
21. मोतीलाल नेहरू तथा चितरंजनदास 22. भारत में साम्यवादी आन्दोलन तथा चिन्तन 23. मानवेन्द्र नाथ राय 24. भारत में समाजवादी चिन्तन 25. जवाहरलाल नेहरू 26. नेहरू का इतिहास दर्शन 27. सुभाषचन्द्र बोस 28. सर्वोदय 29. निष्कर्ष तथा समीक्षा

भाग 6. अस्मद्कालीन भारतीय राजनीतिक चिन्तन की कुछ समस्याएँ
30. लोकतन्त्र तथा भारतीय संस्कृति 31. भारतीय लोकतन्त्र के ज्ञानात्मक और शैक्षिक आधार 32. भारतीय जीवन में संवेगात्मक एकीकरण और भावनाशुद्धि 33. भारतीय लोक प्रशासन में सत्यनिष्ठा 34. पंचायती राज के कुछ पहलू तथा सर्वोदय 35. भारतीय लोकतन्त्र की गतिशीलता के कुछ पहलू 36. भारतीय लोकतन्त्र का दर्शन

परिशिष्ट
1. आधुनिक भारतीय चिन्तन पर आर्यसमाज का प्रभाव 2. व्यावहारिक गांधीवाद 3. बल्लभभाई पटेल: लौह स्वराज्य 4. राजेन्द्रप्रसाद का गाँधीवादी चिन्तन 5. जवाहरलाल नेहरू: समाजवाद और शान्ति 6. स्वच्छंदतावाद और ऐतिहासिक राष्ट्रवाद 7. आधुनिक युग में राजनीतिक दर्शन 8. आधुनिक भारतीय राजनीतिक विचार तथा राजनीति 9. भारतीय स्वातऩ्त्रय और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक विषयक चिन्तन 10. स्वामी सत्यदेव परिव्राजक: व्यक्तित्व और कृतित्व 11. धर्ममीमांसा और राधाकृष्णन् 12. भारत भक्ति और जड़त बुद्धियोग 13. राष्ट्रवाद का प्रतीक: राष्ट्रीय ध्वज 14. आधुनिक भारतीय चिन्तन के महान् प्रशस्तिकार-रोम्याँ रोलाँ 15. महाभारतः शान्तिपर्व में वर्णित राजनीतिक विचार 16. मनु 17. कौटिल्य 18. जयप्रकाश नारायण 19. ई. वी. रामास्वामी पेरियार 20. भीमराव रामजी अम्बेदकर

The political thought of India extending from the days of the Vedas, Panini, Kadambari to the epochs of Dayananda, Tilak, Vivekananda and Gandhi is phenomenal in its significance not only for India and Asia but for the world. Ancient and Medieval Indian Political Thought and Modern Indian Political Thought constitute definite encyclopedic reference works on Indian Political Thought.

 

Dr. Vishwanath Prasad Varma popularly known as Dr. V. P. Varma, has got worldwide recognition as an eminent political scientist. He obtained his MA degree in Political Science from the Columbia University (1948) and Ph.D. in Political Science from the Chicago University. He also had the distinction to serve Patna University as Head of the Department of Political Science and Director of the Institute of Public Administration continuously for 22 years. His book Modern Indian Political Thought is internationally famous and is taught in the U.S.A., England and Germany. Reviewing the book “THE TIMES LITERARY SUPPLEMENT”, London has hailed the author as an Exceptionally learned Political Philosopher. He made exposition of his writings as President of All India Political Science Association in Mumbai, Oct. 1968 in his presidential address. Through his writings he has tried to inject into the minds of students and teachers a sense of fearlessness and old values, enshrined in the ancient Indian scriptures and philosophy of political and social thinkers.

 

“Large number of people, including scholars, mourned Varma, who was an expert on Vedas.”

– The Times of India

Description

Adhunik Bhartiya Rajnitik Chintan- , By – Dr. V.P. Verma, ISBN Code – 978-93-86828-29-3

 

इस पुस्तक की विषय सूची इस प्रकार है-

भाग 1. भारत में पुनर्जागरण
1. ऐतिहासिक और विचारानुगत पृष्ठभूमि 2. भारत में पुनर्जागरण, राष्ट्रवाद और राजशास्त्रात्मक चिन्तन 3. भारतीय स्वातन्त्रय आन्दोलन 4. ब्रह्म समाज 5. दयानन्द सरस्वती 6. एनी बेसेन्ट तथा थियोसोफी 7. रवीन्द्रनाथ ठाकुर 8. स्वामी विवेकानन्द तथा स्वामी रामतीर्थ

भाग 2. भारतीय मितवादी तथा अतिवादी (उग्रतावादी)
9. दादाभाई नौरोबी 10. महादेव गोविन्द रानाडे 11. फिरोजशाह मेहता तथा सुरेन्द्रनाथ बनर्जी 12. गोपालकृष्ण गोखले 13. बाल गंगाधर तिलक 14. तिलक का गीता-रहस्य 15. विपिनचन्द्र पाल तथा लाला लाजपत राय 16. श्री अरविन्द

भाग 3. महात्मा मोहनदास करमचन्द गाँधी
17. महात्मा मोहनदास करमचन्द गाँधी

भाग 4. आधुनिक भारत में धर्म तथा राजनीति
18. हिन्दू पुनरुत्थानवाद तथा दार्शनिक आदर्शवाद 19. मुस्लिम राजनीतिक चिन्तन 20. मुहम्मद इकबाल

भाग 5. अर्वाचीन भारतीय राजनीतिक चिन्तन
21. मोतीलाल नेहरू तथा चितरंजनदास 22. भारत में साम्यवादी आन्दोलन तथा चिन्तन 23. मानवेन्द्र नाथ राय 24. भारत में समाजवादी चिन्तन 25. जवाहरलाल नेहरू 26. नेहरू का इतिहास दर्शन 27. सुभाषचन्द्र बोस 28. सर्वोदय 29. निष्कर्ष तथा समीक्षा

भाग 6. अस्मद्कालीन भारतीय राजनीतिक चिन्तन की कुछ समस्याएँ
30. लोकतन्त्र तथा भारतीय संस्कृति 31. भारतीय लोकतन्त्र के ज्ञानात्मक और शैक्षिक आधार 32. भारतीय जीवन में संवेगात्मक एकीकरण और भावनाशुद्धि 33. भारतीय लोक प्रशासन में सत्यनिष्ठा 34. पंचायती राज के कुछ पहलू तथा सर्वोदय 35. भारतीय लोकतन्त्र की गतिशीलता के कुछ पहलू 36. भारतीय लोकतन्त्र का दर्शन

परिशिष्ट
1. आधुनिक भारतीय चिन्तन पर आर्यसमाज का प्रभाव 2. व्यावहारिक गांधीवाद 3. बल्लभभाई पटेल: लौह स्वराज्य 4. राजेन्द्रप्रसाद का गाँधीवादी चिन्तन 5. जवाहरलाल नेहरू: समाजवाद और शान्ति 6. स्वच्छंदतावाद और ऐतिहासिक राष्ट्रवाद 7. आधुनिक युग में राजनीतिक दर्शन 8. आधुनिक भारतीय राजनीतिक विचार तथा राजनीति 9. भारतीय स्वातऩ्त्रय और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक विषयक चिन्तन 10. स्वामी सत्यदेव परिव्राजक: व्यक्तित्व और कृतित्व 11. धर्ममीमांसा और राधाकृष्णन् 12. भारत भक्ति और जड़त बुद्धियोग 13. राष्ट्रवाद का प्रतीक: राष्ट्रीय ध्वज 14. आधुनिक भारतीय चिन्तन के महान् प्रशस्तिकार-रोम्याँ रोलाँ 15. महाभारतः शान्तिपर्व में वर्णित राजनीतिक विचार 16. मनु 17. कौटिल्य 18. जयप्रकाश नारायण 19. ई. वी. रामास्वामी पेरियार 20. भीमराव रामजी अम्बेदकर

The political thought of India extending from the days of the Vedas, Panini, Kadambari to the epochs of Dayananda, Tilak, Vivekananda and Gandhi is phenomenal in its significance not only for India and Asia but for the world. Ancient and Medieval Indian Political Thought and Modern Indian Political Thought constitute definite encyclopedic reference works on Indian Political Thought.

 

Dr. Vishwanath Prasad Varma popularly known as Dr. V. P. Varma, has got worldwide recognition as an eminent political scientist. He obtained his MA degree in Political Science from the Columbia University (1948) and Ph.D. in Political Science from the Chicago University. He also had the distinction to serve Patna University as Head of the Department of Political Science and Director of the Institute of Public Administration continuously for 22 years. His book Modern Indian Political Thought is internationally famous and is taught in the U.S.A., England and Germany. Reviewing the book “THE TIMES LITERARY SUPPLEMENT”, London has hailed the author as an Exceptionally learned Political Philosopher. He made exposition of his writings as President of All India Political Science Association in Mumbai, Oct. 1968 in his presidential address. Through his writings he has tried to inject into the minds of students and teachers a sense of fearlessness and old values, enshrined in the ancient Indian scriptures and philosophy of political and social thinkers.

 

“Large number of people, including scholars, mourned Varma, who was an expert on Vedas.”

– The Times of India

Additional information

Cover Type

Hard Bound Edition, Paper Back Edition

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