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शास्त्रीय समाजशास्त्रीय चिंतन – Classical Sociological Thought (Text) – By P.Jain

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शास्त्रीय समाजशास्त्रीय चिंतन – Classical Sociological Thought (Text) – By P.Jain ISBN – 978-81-69938-19-8

पृष्ठ 1

विषय-सूची

अध्याय | पृष्ठ

1. समाजशास्त्र के उद्भव के बौद्धिक स्रोत …………………………………. 1–18
[Intellectual Sources of the Emergence of Sociology]

(समाजशास्त्र का उद्भव एवं विकास, समाजशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषाएँ, यूरोप में ज्ञानोदय, ज्ञानोदय का अर्थ, ज्ञानोदय की शुरुआत, ज्ञानोदय की प्रमुख विशेषताएँ, ज्ञानोदय के प्रमुख विचारक, ज्ञानोदय का यूरोपीय समाज पर प्रभाव, ज्ञानोदय का आलोचनात्मक मूल्यांकन, ज्ञानोदय और फ्रांसीसी क्रांति, इतिहास का दर्शन, इतिहास के दर्शन का अर्थ, इतिहास के दर्शन की प्रमुख विशेषताएँ, ज्ञानोदय तथा इतिहास का दर्शन, विभिन्न दार्शनिकों का योगदान, राजनीतिक दर्शन, विभिन्न दार्शनिकों के योगदान, सामाजिक एवं राजनीतिक सुधार आन्दोलन, अभ्यास प्रश्न।)

2. फ्रांस की क्रान्ति ……………………………………………………….. 19–31
[French Revolution]

(यूरोप में क्रान्ति से पूर्व की दशाएँ, फ्रांस की क्रान्ति का उद्भव, फ्रांस की क्रान्ति के कारण, फ्रांस की क्रान्ति का घटनाक्रम, फ्रांस की क्रान्ति के प्रभाव, अन्य देशों पर क्रान्ति का प्रभाव, अभ्यास प्रश्न।)

3. औद्योगिक क्रान्ति ………………………………………………………. 32–47
[Industrial Revolution]

(औद्योगिक क्रान्ति का अर्थ व परिभाषाएँ, औद्योगिक क्रान्ति के कारण, औद्योगिक क्रान्ति का आरम्भिक स्तर, औद्योगिक क्रान्ति का विकास स्तर, औद्योगिक क्रान्ति के प्रभाव, यूरोप में समाजवाद का उद्भव, यूरोप में आरम्भिक समाजवाद की मुख्य विशेषताएँ, अभ्यास प्रश्न।)

4. ऑगस्ट कॉम्टे (1798–1857) ……………………………………………. 48–66
[August Comte (1798–1857)]

(ऑगस्ट कॉम्टे का जीवन-चित्रण, कॉम्टे के प्रमुख ग्रन्थ अथवा कृतियाँ, प्रत्यक्षवाद, प्रत्यक्षवाद का अर्थ, प्रत्यक्षवाद की परिभाषाएँ, प्रत्यक्षवाद की मान्यताएँ, प्रत्यक्षवाद के विभाग, प्रत्यक्षवाद का आलोचनात्मक मूल्यांकन, विज्ञानों का संस्तरण, संस्तरण के दो आधार या सिद्धान्त, कॉम्टे के अनुसार विज्ञान, प्राकृतिक घटनाएँ, विज्ञान के संस्तरण के भाग, समाजशास्त्र : कॉम्टे का एक नया विज्ञान, तीन स्तरों का नियम/चिन्तन के स्तर, विकास के स्तरों एवं सामाजिक संगठन में सम्बन्ध, ऑगस्ट कॉम्टे का समाजशास्त्र को योगदान, अभ्यास प्रश्न।)


पृष्ठ 2

5. हर्बर्ट स्पेन्सर (1820–1903) ………………………………………… 67–78
[Herbert Spencer (1820–1903)]

(हर्बर्ट स्पेन्सर का जीवन चित्रण, सामाजिक उद्विकास, उद्विकास का अर्थ, परिभाषाएँ, स्पेन्सर के सामाजिक उद्विकास सिद्धान्त की मुख्य विशेषताएँ, सामाजिक उद्विकास की प्रक्रिया, स्पेन्सर के सिद्धान्त का महत्व, स्पेन्सर के सिद्धान्त की आलोचना, सामाजिक डार्विनवाद, स्पेन्सर के सामाजिक उद्विकास सिद्धान्त का आलोचनात्मक मूल्यांकन, अभ्यास प्रश्न।)

6. इमाइल दुर्खीम (1858–1917) ………………………………………… 79–103
[Emile Durkheim (1858–1917)]

(दुर्खीम का जीवन-चित्रण, दुर्खीम के प्रमुख ग्रन्थ व कृतियाँ, सामाजिक तथ्य, सामाजिक तथ्य क्या है ?, सामाजिक तथ्य की विशेषताएँ, सामाजिक तथ्यों के प्रकार, सामाजिक तथ्यों की व्याख्या (अवलोकन) के नियम, सामाजिक घटनाओं के अध्ययन में सामाजिक तथ्यों का महत्व, सामाजिक तथ्य की अवधारणा की समीक्षा, दुर्खीम की सामाजिक तथ्य की अवधारणा की आलोचना, यान्त्रिक एवं सावयवी एकता, सामाजिक एकता की अवधारणा, एकता के आधार पर समाज का वर्गीकरण, यान्त्रिक एवं सावयवी एकता में अन्तर, आत्महत्या का सिद्धान्त, आत्महत्या की अवधारणा, आत्महत्या के कारण, आत्महत्या के गैर-सामाजिक कारण, सामाजिक कारण, आत्महत्या के प्रकार, आत्महत्या के सिद्धान्त की समीक्षा, दुर्खीम के आत्महत्या के सिद्धान्त का आलोचनात्मक मूल्यांकन, अभ्यास प्रश्न।)

7. विलफ्रेडो पैरेटो (1848–1923) ………………………………………. 104–122
[Vilfredo Pareto (1848–1923)]

(विलफ्रेडो पैरेटो की जीवन चित्रण, पैरेटो के प्रमुख ग्रन्थ व कृतियाँ, पैरेटो की वैज्ञानिक समाजशास्त्र की अवधारणा, तार्किक एवं अतार्किक क्रिया, तार्किक क्रिया का अर्थ, तार्किक क्रिया की परिभाषा, तार्किक क्रिया की विशेषताएँ, अतार्किक क्रिया का अर्थ, अतार्किक क्रिया की परिभाषा, अतार्किक क्रिया की विशेषताएँ, अतार्किक क्रिया के अध्ययन की विधि, पैरेटो के सिद्धान्त की आलोचना, सिद्धान्त का महत्व, विशिष्ट चालक/अवशिष्ट/अवशेषों की अवधारणा, अवशेष/अवशिष्ट क्रिया का महत्व, अवशिष्ट के वर्ग, भ्रान्त तर्क की अवधारणा, भ्रान्त तर्क का अर्थ, भ्रान्त तर्क की परिभाषा, भ्रान्त तर्क की विशेषताएँ, भ्रान्त तर्क के प्रकार, अभ्यास प्रश्न।)


पृष्ठ 3

8. कार्ल मार्क्स (1818–1883) …………………………………………….. 123–148
[Karl Marx (1818–1883)]

(कार्ल मार्क्स का जीवन-चित्रण, मार्क्स के प्रमुख ग्रन्थ एवं कृतियाँ, द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद, द्वन्द्वात्मक का अर्थ, मार्क्स का द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का परिचय, द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद की विशेषताएँ, ऐतिहासिक भौतिकवाद, समाज का विभिन्न ऐतिहासिक युगों में विभाजन, मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद (आर्थिक निर्धारणवाद) की व्याख्या, ऐतिहासिक भौतिकवाद की समीक्षा, मार्क्स द्वारा प्रस्तुत इतिहास की भौतिकवादी (आर्थिक) व्याख्या की आलोचना, वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त, वर्ग संघर्ष का अर्थ, वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त, समाज में वर्गों का जन्म होने के कारण, वर्गों के प्रकार, वर्ग संघर्ष के सिद्धान्त की आलोचना, वर्ग संघर्ष और पूँजीवाद, वर्ग संघर्ष के सिद्धान्त की समीक्षा, अलगाव का सिद्धान्त, अलगाव का अर्थ, अलगाव के सम्बन्ध में मार्क्स के विचार, अलगाव की विशेषताएँ, अलगाव के कारण, अलगाव के स्वरूप, अलगाव के सिद्धान्त का मूल्यांकन, अभ्यास प्रश्न।)

9. मैक्स वेबर (1864–1920) ………………………………………………. 149–171
[Max Weber (1864–1920)]

(जीवन-परिचय एवं बौद्धिक पृष्ठभूमि, वेबर की समाजशास्त्र की अवधारणा, सामाजिक क्रिया का सिद्धान्त, सामाजिक क्रिया का अर्थ एवं परिभाषाएँ, सिद्धान्त की व्याख्या, सामाजिक क्रिया के प्रकार, सामाजिक क्रिया की विशेषताएँ, सामाजिक क्रिया सिद्धान्त का महत्व, सामाजिक क्रिया के सिद्धान्त की समीक्षा, शक्ति एवं सत्ता का सिद्धान्त, शक्ति की अवधारणा, शक्ति का अर्थ, शक्ति की विशेषताएँ, सत्ता का सिद्धान्त, सत्ता के तत्व, सत्ता के प्रकार, चमत्कारिक, तार्किक तथा परम्परागत सत्ता में भेद, शक्ति एवं सत्ता में अन्तर, प्रोटेस्टेन्ट आचार तथा पूँजीवाद की आत्मा, मैक्स वेबर का धर्म का समाजशास्त्र, धर्म के समाजशास्त्र की आधारभूत मान्यताएँ, धर्म के समाजशास्त्र के प्रमुख आधार, प्रोटेस्टेन्ट ईथिक एवं पूँजीवाद की आत्मा के आदर्श-प्रारूप, प्रोटेस्टेन्ट आचार और पूँजीवाद का सम्बन्ध, आधुनिक पूँजीवादी और प्रोटेस्टेन्ट आचार के प्रमुख लक्षण, पूँजीवाद के विकास में प्रोटेस्टेन्ट धर्म का योगदान, आलोचनात्मक मूल्यांकन, कार्ल मार्क्स तथा मैक्स वेबर के विचारों की तुलना, अभ्यास प्रश्न।)

10. जॉर्ज हर्बर्ट मीड (1863–1931) ……………………………………. 172–189
[George Herbert Mead (1863–1931)]

(प्रतीकात्मक अन्तर्क्रिया, जॉर्ज हर्बर्ट मीड का जीवन-चित्रण, प्रतीकात्मक अन्तर्क्रिया, प्रतीकात्मक अन्तर्क्रिया का अर्थ, प्रतीकात्मक


पृष्ठ 4

अन्तर्क्रियावाद का उद्भव, प्रतीकात्मक अन्तर्क्रियावाद की मान्यताएँ, मीड का प्रतीकात्मक अन्तर्क्रियावाद, मीड के सिद्धान्त की अवधारणाएँ, मीड के सिद्धान्त का महत्व, मीड के प्रतीकात्मक अन्तर्क्रियावाद का मूल्यांकन, ‘स्व’ एवं ‘मुझे’ की अवधारणाएँ, मीड का समाजशास्त्र को योगदान, सामाजिक अनुकरणता, निष्कर्ष, अभ्यास प्रश्न।)

11. टालकॉर्ट पार्सन्स (1902–1979) …………………………………….. 190–214
[Talcott Parsons (1902–1979)]

(टालकॉर्ट पार्सन्स का जीवन-परिचय, पार्सन्स के प्रमुख ग्रन्थ अथवा कृतियाँ, सामाजिक क्रिया का सिद्धान्त, सामाजिक क्रिया का अर्थ, सामाजिक क्रिया के तत्व, चारों तत्वों का आपसी सम्बन्ध, सामाजिक व्यवस्था में क्रिया का स्थान, क्रिया की सन्दर्भ संरचना, पार्सन्स के अनुसार सामाजिक क्रिया की विशेषताएँ, समालोचनात्मक मूल्यांकन, सामाजिक व्यवस्था की अवधारणा, सामाजिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ, सामाजिक व्यवस्था की संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक उपव्यवस्थाएँ, संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक उपव्यवस्थाओं में अन्तर, पार्सन्स के विचारों का आलोचनात्मक मूल्यांकन, पार्सन्स के विचारों की विशेषताएँ, पार्सन्स के विचारों की आलोचना, प्रतिमानित विकल्प, प्रतिमानित विकल्पों के प्रकार, प्रतिमानित विकल्पों का महत्व, अभ्यास प्रश्न।)

12. रॉबर्ट के. मर्टन (1910–2003) ……………………………………… 215–228
[Robert K. Merton (1910–2003)]

(मर्टन का जीवन-चित्रण, मर्टन के प्रमुख ग्रन्थ अथवा कृतियाँ, रॉबर्ट के. मर्टन का मध्य अभिसीमा सिद्धान्त, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त का अर्थ, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त की प्रकृति, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त की विशेषताएँ, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त के उद्देश्य, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त के उदाहरण, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त का महत्व, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त की आलोचना, निष्कर्ष, मर्टन की प्रकार्य अवधारणा, अकार्य की अवधारणा, प्रकट एवं प्रच्छन्न प्रकार्य, प्रकट एवं अकार्य में अन्तर, मानसिक प्रयोग, तुलनात्मक विश्लेषण, मर्टन का प्रकार्यात्मक रूप-निर्देशन, मर्टन के सिद्धान्त की विशेषताएँ, मर्टन के सिद्धान्त की आलोचना, निष्कर्ष, अभ्यास प्रश्न।)

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शास्त्रीय समाजशास्त्रीय चिंतन – Classical Sociological Thought (Text) – By P.Jain ISBN – 978-81-69938-19-8

पृष्ठ 1

विषय-सूची

अध्याय | पृष्ठ

1. समाजशास्त्र के उद्भव के बौद्धिक स्रोत …………………………………. 1–18
[Intellectual Sources of the Emergence of Sociology]

(समाजशास्त्र का उद्भव एवं विकास, समाजशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषाएँ, यूरोप में ज्ञानोदय, ज्ञानोदय का अर्थ, ज्ञानोदय की शुरुआत, ज्ञानोदय की प्रमुख विशेषताएँ, ज्ञानोदय के प्रमुख विचारक, ज्ञानोदय का यूरोपीय समाज पर प्रभाव, ज्ञानोदय का आलोचनात्मक मूल्यांकन, ज्ञानोदय और फ्रांसीसी क्रांति, इतिहास का दर्शन, इतिहास के दर्शन का अर्थ, इतिहास के दर्शन की प्रमुख विशेषताएँ, ज्ञानोदय तथा इतिहास का दर्शन, विभिन्न दार्शनिकों का योगदान, राजनीतिक दर्शन, विभिन्न दार्शनिकों के योगदान, सामाजिक एवं राजनीतिक सुधार आन्दोलन, अभ्यास प्रश्न।)

2. फ्रांस की क्रान्ति ……………………………………………………….. 19–31
[French Revolution]

(यूरोप में क्रान्ति से पूर्व की दशाएँ, फ्रांस की क्रान्ति का उद्भव, फ्रांस की क्रान्ति के कारण, फ्रांस की क्रान्ति का घटनाक्रम, फ्रांस की क्रान्ति के प्रभाव, अन्य देशों पर क्रान्ति का प्रभाव, अभ्यास प्रश्न।)

3. औद्योगिक क्रान्ति ………………………………………………………. 32–47
[Industrial Revolution]

(औद्योगिक क्रान्ति का अर्थ व परिभाषाएँ, औद्योगिक क्रान्ति के कारण, औद्योगिक क्रान्ति का आरम्भिक स्तर, औद्योगिक क्रान्ति का विकास स्तर, औद्योगिक क्रान्ति के प्रभाव, यूरोप में समाजवाद का उद्भव, यूरोप में आरम्भिक समाजवाद की मुख्य विशेषताएँ, अभ्यास प्रश्न।)

4. ऑगस्ट कॉम्टे (1798–1857) ……………………………………………. 48–66
[August Comte (1798–1857)]

(ऑगस्ट कॉम्टे का जीवन-चित्रण, कॉम्टे के प्रमुख ग्रन्थ अथवा कृतियाँ, प्रत्यक्षवाद, प्रत्यक्षवाद का अर्थ, प्रत्यक्षवाद की परिभाषाएँ, प्रत्यक्षवाद की मान्यताएँ, प्रत्यक्षवाद के विभाग, प्रत्यक्षवाद का आलोचनात्मक मूल्यांकन, विज्ञानों का संस्तरण, संस्तरण के दो आधार या सिद्धान्त, कॉम्टे के अनुसार विज्ञान, प्राकृतिक घटनाएँ, विज्ञान के संस्तरण के भाग, समाजशास्त्र : कॉम्टे का एक नया विज्ञान, तीन स्तरों का नियम/चिन्तन के स्तर, विकास के स्तरों एवं सामाजिक संगठन में सम्बन्ध, ऑगस्ट कॉम्टे का समाजशास्त्र को योगदान, अभ्यास प्रश्न।)


पृष्ठ 2

5. हर्बर्ट स्पेन्सर (1820–1903) ………………………………………… 67–78
[Herbert Spencer (1820–1903)]

(हर्बर्ट स्पेन्सर का जीवन चित्रण, सामाजिक उद्विकास, उद्विकास का अर्थ, परिभाषाएँ, स्पेन्सर के सामाजिक उद्विकास सिद्धान्त की मुख्य विशेषताएँ, सामाजिक उद्विकास की प्रक्रिया, स्पेन्सर के सिद्धान्त का महत्व, स्पेन्सर के सिद्धान्त की आलोचना, सामाजिक डार्विनवाद, स्पेन्सर के सामाजिक उद्विकास सिद्धान्त का आलोचनात्मक मूल्यांकन, अभ्यास प्रश्न।)

6. इमाइल दुर्खीम (1858–1917) ………………………………………… 79–103
[Emile Durkheim (1858–1917)]

(दुर्खीम का जीवन-चित्रण, दुर्खीम के प्रमुख ग्रन्थ व कृतियाँ, सामाजिक तथ्य, सामाजिक तथ्य क्या है ?, सामाजिक तथ्य की विशेषताएँ, सामाजिक तथ्यों के प्रकार, सामाजिक तथ्यों की व्याख्या (अवलोकन) के नियम, सामाजिक घटनाओं के अध्ययन में सामाजिक तथ्यों का महत्व, सामाजिक तथ्य की अवधारणा की समीक्षा, दुर्खीम की सामाजिक तथ्य की अवधारणा की आलोचना, यान्त्रिक एवं सावयवी एकता, सामाजिक एकता की अवधारणा, एकता के आधार पर समाज का वर्गीकरण, यान्त्रिक एवं सावयवी एकता में अन्तर, आत्महत्या का सिद्धान्त, आत्महत्या की अवधारणा, आत्महत्या के कारण, आत्महत्या के गैर-सामाजिक कारण, सामाजिक कारण, आत्महत्या के प्रकार, आत्महत्या के सिद्धान्त की समीक्षा, दुर्खीम के आत्महत्या के सिद्धान्त का आलोचनात्मक मूल्यांकन, अभ्यास प्रश्न।)

7. विलफ्रेडो पैरेटो (1848–1923) ………………………………………. 104–122
[Vilfredo Pareto (1848–1923)]

(विलफ्रेडो पैरेटो की जीवन चित्रण, पैरेटो के प्रमुख ग्रन्थ व कृतियाँ, पैरेटो की वैज्ञानिक समाजशास्त्र की अवधारणा, तार्किक एवं अतार्किक क्रिया, तार्किक क्रिया का अर्थ, तार्किक क्रिया की परिभाषा, तार्किक क्रिया की विशेषताएँ, अतार्किक क्रिया का अर्थ, अतार्किक क्रिया की परिभाषा, अतार्किक क्रिया की विशेषताएँ, अतार्किक क्रिया के अध्ययन की विधि, पैरेटो के सिद्धान्त की आलोचना, सिद्धान्त का महत्व, विशिष्ट चालक/अवशिष्ट/अवशेषों की अवधारणा, अवशेष/अवशिष्ट क्रिया का महत्व, अवशिष्ट के वर्ग, भ्रान्त तर्क की अवधारणा, भ्रान्त तर्क का अर्थ, भ्रान्त तर्क की परिभाषा, भ्रान्त तर्क की विशेषताएँ, भ्रान्त तर्क के प्रकार, अभ्यास प्रश्न।)


पृष्ठ 3

8. कार्ल मार्क्स (1818–1883) …………………………………………….. 123–148
[Karl Marx (1818–1883)]

(कार्ल मार्क्स का जीवन-चित्रण, मार्क्स के प्रमुख ग्रन्थ एवं कृतियाँ, द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद, द्वन्द्वात्मक का अर्थ, मार्क्स का द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का परिचय, द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद की विशेषताएँ, ऐतिहासिक भौतिकवाद, समाज का विभिन्न ऐतिहासिक युगों में विभाजन, मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद (आर्थिक निर्धारणवाद) की व्याख्या, ऐतिहासिक भौतिकवाद की समीक्षा, मार्क्स द्वारा प्रस्तुत इतिहास की भौतिकवादी (आर्थिक) व्याख्या की आलोचना, वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त, वर्ग संघर्ष का अर्थ, वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त, समाज में वर्गों का जन्म होने के कारण, वर्गों के प्रकार, वर्ग संघर्ष के सिद्धान्त की आलोचना, वर्ग संघर्ष और पूँजीवाद, वर्ग संघर्ष के सिद्धान्त की समीक्षा, अलगाव का सिद्धान्त, अलगाव का अर्थ, अलगाव के सम्बन्ध में मार्क्स के विचार, अलगाव की विशेषताएँ, अलगाव के कारण, अलगाव के स्वरूप, अलगाव के सिद्धान्त का मूल्यांकन, अभ्यास प्रश्न।)

9. मैक्स वेबर (1864–1920) ………………………………………………. 149–171
[Max Weber (1864–1920)]

(जीवन-परिचय एवं बौद्धिक पृष्ठभूमि, वेबर की समाजशास्त्र की अवधारणा, सामाजिक क्रिया का सिद्धान्त, सामाजिक क्रिया का अर्थ एवं परिभाषाएँ, सिद्धान्त की व्याख्या, सामाजिक क्रिया के प्रकार, सामाजिक क्रिया की विशेषताएँ, सामाजिक क्रिया सिद्धान्त का महत्व, सामाजिक क्रिया के सिद्धान्त की समीक्षा, शक्ति एवं सत्ता का सिद्धान्त, शक्ति की अवधारणा, शक्ति का अर्थ, शक्ति की विशेषताएँ, सत्ता का सिद्धान्त, सत्ता के तत्व, सत्ता के प्रकार, चमत्कारिक, तार्किक तथा परम्परागत सत्ता में भेद, शक्ति एवं सत्ता में अन्तर, प्रोटेस्टेन्ट आचार तथा पूँजीवाद की आत्मा, मैक्स वेबर का धर्म का समाजशास्त्र, धर्म के समाजशास्त्र की आधारभूत मान्यताएँ, धर्म के समाजशास्त्र के प्रमुख आधार, प्रोटेस्टेन्ट ईथिक एवं पूँजीवाद की आत्मा के आदर्श-प्रारूप, प्रोटेस्टेन्ट आचार और पूँजीवाद का सम्बन्ध, आधुनिक पूँजीवादी और प्रोटेस्टेन्ट आचार के प्रमुख लक्षण, पूँजीवाद के विकास में प्रोटेस्टेन्ट धर्म का योगदान, आलोचनात्मक मूल्यांकन, कार्ल मार्क्स तथा मैक्स वेबर के विचारों की तुलना, अभ्यास प्रश्न।)

10. जॉर्ज हर्बर्ट मीड (1863–1931) ……………………………………. 172–189
[George Herbert Mead (1863–1931)]

(प्रतीकात्मक अन्तर्क्रिया, जॉर्ज हर्बर्ट मीड का जीवन-चित्रण, प्रतीकात्मक अन्तर्क्रिया, प्रतीकात्मक अन्तर्क्रिया का अर्थ, प्रतीकात्मक


पृष्ठ 4

अन्तर्क्रियावाद का उद्भव, प्रतीकात्मक अन्तर्क्रियावाद की मान्यताएँ, मीड का प्रतीकात्मक अन्तर्क्रियावाद, मीड के सिद्धान्त की अवधारणाएँ, मीड के सिद्धान्त का महत्व, मीड के प्रतीकात्मक अन्तर्क्रियावाद का मूल्यांकन, ‘स्व’ एवं ‘मुझे’ की अवधारणाएँ, मीड का समाजशास्त्र को योगदान, सामाजिक अनुकरणता, निष्कर्ष, अभ्यास प्रश्न।)

11. टालकॉर्ट पार्सन्स (1902–1979) …………………………………….. 190–214
[Talcott Parsons (1902–1979)]

(टालकॉर्ट पार्सन्स का जीवन-परिचय, पार्सन्स के प्रमुख ग्रन्थ अथवा कृतियाँ, सामाजिक क्रिया का सिद्धान्त, सामाजिक क्रिया का अर्थ, सामाजिक क्रिया के तत्व, चारों तत्वों का आपसी सम्बन्ध, सामाजिक व्यवस्था में क्रिया का स्थान, क्रिया की सन्दर्भ संरचना, पार्सन्स के अनुसार सामाजिक क्रिया की विशेषताएँ, समालोचनात्मक मूल्यांकन, सामाजिक व्यवस्था की अवधारणा, सामाजिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ, सामाजिक व्यवस्था की संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक उपव्यवस्थाएँ, संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक उपव्यवस्थाओं में अन्तर, पार्सन्स के विचारों का आलोचनात्मक मूल्यांकन, पार्सन्स के विचारों की विशेषताएँ, पार्सन्स के विचारों की आलोचना, प्रतिमानित विकल्प, प्रतिमानित विकल्पों के प्रकार, प्रतिमानित विकल्पों का महत्व, अभ्यास प्रश्न।)

12. रॉबर्ट के. मर्टन (1910–2003) ……………………………………… 215–228
[Robert K. Merton (1910–2003)]

(मर्टन का जीवन-चित्रण, मर्टन के प्रमुख ग्रन्थ अथवा कृतियाँ, रॉबर्ट के. मर्टन का मध्य अभिसीमा सिद्धान्त, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त का अर्थ, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त की प्रकृति, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त की विशेषताएँ, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त के उद्देश्य, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त के उदाहरण, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त का महत्व, मध्य-अभिसीमा सिद्धान्त की आलोचना, निष्कर्ष, मर्टन की प्रकार्य अवधारणा, अकार्य की अवधारणा, प्रकट एवं प्रच्छन्न प्रकार्य, प्रकट एवं अकार्य में अन्तर, मानसिक प्रयोग, तुलनात्मक विश्लेषण, मर्टन का प्रकार्यात्मक रूप-निर्देशन, मर्टन के सिद्धान्त की विशेषताएँ, मर्टन के सिद्धान्त की आलोचना, निष्कर्ष, अभ्यास प्रश्न।)

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