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भारत का सामाजिक-सांस्कृतिक एवं आर्थिक इतिहास-Socio-Cultural and Economic History of India

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भारत का सामाजिक-सांस्कृतिक एवं आर्थिक इतिहास-Socio-Cultural and Economic History of India

ISBN: 978-93-47520-47-1

विषय-सूची

अध्याय                         पृष्ठ

1200–1700 ई.

1. सल्तनत एवं मुगल काल के दौरान सामाजिक स्थिति         … 1 – 29
[Social Condition during Sultanate and Mughal Period]
(सल्तनत कालीन समाज, मुस्लिम समाज, हिन्दू समाज, सल्तनत काल (1200-1526 ई.) में सामाजिक स्थिति, सल्तनत काल में हिन्दुओं की स्थिति, मुगलकालीन समाज, मुस्लिम समाज, हिन्दू समाज, मुगल–काल (1526-1707 ई.) की सामाजिक स्थिति, मुगल काल में हिन्दुओं की स्थिति, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

2. अलाउद्दीन खिलजी की बाजार-नियंत्रण नीति एवं राजस्व प्रणाली   … 30 – 39
[Market Control Policy and Revenue System of Alauddin Khalji]
(आर्थिक सुधार, अलाउद्दीन खिलजी की बाजार-नियंत्रण नीति : बाजार-नियंत्रण नीति के कारण व उद्देश्य, बाजार-नियंत्रण नीति के लाभ, बाजार-नियंत्रण नीति के दोष, अलाउद्दीन खिलजी की भू-राजस्व व्यवस्था, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

3. भारत में भक्ति और सूफी आंदोलन : कारण एवं प्रमुख सिद्धान्त    … 40 – 74
[Bhakti and Sufism Movement in India : Causes and Main Principles]
(भक्ति-आंदोलन, भक्ति-आंदोलन का उद्भव, भक्ति-आंदोलन के उद्देश्य, भक्ति-आंदोलन के उदय के कारण, भक्ति-आंदोलन की विशेषताएँ, भक्ति-आंदोलन के प्रमुख सन्त एवं उनकी विचारधाराएँ, भक्ति-आंदोलन के प्रभाव, भारत में सूफी धर्म, ‘सूफी’ शब्द का अर्थ, सूफी मत का उद्गम, वहदत-उल-वुजूद का सिद्धान्त, सूफी धर्म के सिद्धान्त, सूफी सन्तों का उद्देश्य, खानकाह पद्धति, भारतीय समाज पर सूफी धर्म का प्रभाव, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

4. सल्तनत काल में महिलाओं की स्थिति              … 75 – 81
[Condition of Women during Sultanate Period]
(वेषभूषा, मनोरंजन के साधन, पर्दा प्रथा, विवाह प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह, सती प्रथा, जौहर प्रथा, दास प्रथा, स्त्री शिक्षा, निष्कर्ष, अभ्यासार्थ प्रश्न।)


(vi)

5. मुगल काल में भू-राजस्व व्यवस्था               … 82 – 92
[Land Revenue System during Mughal Period]
(अकबर एवं मुगल भू-राजस्व सुधार, राजस्व प्रशासन, केन्द्रीय स्तर पर राजस्व प्रशासन, प्रांतीय स्तर पर राजस्व प्रशासन, परगना स्तर पर राजस्व प्रशासन, ग्रामीण स्तर पर राजस्व प्रशासन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

6. मुगल काल में व्यापार एवं वाणिज्य              … 93 – 101
[Trade and Commerce during Mughal Period]
मुगलकालीन व्यापारिक-वाणिज्यिक वर्ग, व्यापार-वाणिज्य एवं राज्य की भूमिका, मुगल काल में विदेशी व्यापार एवं वाणिज्य, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

7. मुगल काल में बैंकिंग प्रणाली का विकास            … 102 – 108
[Development of Banking System during Mughal Period]
(सर्राफ वर्ग का उदय, हुंडी प्रणाली, हुंडी प्रणाली की कार्यपद्धति, हुंडियों के विभिन्न प्रकार, हुंडी प्रणाली में कटौती, सर्राफों की भूमिका, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

8. सल्तनत एवं मुगल काल में उद्योगों का विकास          … 109 – 124
[Development of Industries during Sultanate and Mughal Period]
(सल्तनत काल में विभिन्न उद्योग-धन्धों की स्थिति, ग्रामीण एवं शहरी आर्थिक व्यवस्था, शाही कारखाने व हस्त-कला, मुगल काल में कृषि, कृषि से सम्बन्धित ग्राम उद्योग, मूल्य, अकाल, अभ्यासार्थ प्रश्न।)


1700-1900 ई.

1. सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन             … 1 – 21
[Social and Religious Reformation Movement]
(भारतीय पुनर्जागरण के कारण, पुनर्जागरण का स्वरूप, पुनर्जागरण आन्दोलन के परिणाम, सामाजिक-धार्मिक आन्दोलन, राजा राममोहन राय व ब्रह्म समाज, स्वामी दयानन्द सरस्वती व आर्य समाज, स्वामी विवेकानन्द व रामकृष्ण मिशन, श्रीमती एनी बेसेंट और थियोसोफिकल सोसाइटी, अलीगढ़ आन्दोलन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

2. मुस्लिम समाज में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार         … 22 – 30
[Social and Religious Reforms in Muslim Society]
(सैयद अहमद बरेलवी और वहाबी आन्दोलन, मिर्जी गुलाम अहमद और अहमदिया आन्दोलन, देवबन्द आन्दोलन, प्रमुख मुस्लिम समाज सुधारक : सर सैयद अहमद खाँ एवं अलीगढ़ आन्दोलन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)


(vii)

3. औपनिवेशिक काल में भू-राजस्व प्रणालियाँ           … 31 – 45
(स्थायी बन्दोबस्त, महालवाड़ी एवं रैयतवाड़ी व्यवस्था)
[Land Revenue System during Colonial Period]
(Permanent Settlement, Mahalwari and Ryotwari System)
(लॉर्ड कार्नवालिस के भूमि-सुधार (स्थायी बन्दोबस्त), भूमि-सुधारों की आवश्यकता, स्थायी बन्दोबस्त से पूर्व की समस्याएँ, स्थायी बन्दोबस्त की विशेषताएँ अथवा कार्नवालिस के भूमि-सुधारों का स्वरूप, स्थायी बन्दोबस्त का समीक्षात्मक अध्ययन, स्थायी बन्दोबस्त के गुण अथवा लाभ, स्थायी बन्दोबस्त के दोष अथवा हानियाँ, महालवाड़ी पद्धति, मार्टिन बर्ड की भूकर व्यवस्था, महालवाड़ी व्यवस्था के गुण, महालवाड़ी व्यवस्था के अवगुण, रैयतवाड़ी पद्धति, रैयतवाड़ी व्यवस्था के लाभ, रैयतवाड़ी व्यवस्था के दोष, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

4. ब्रिटिश काल में भारतीय हस्तशिल्प का पतन           … 46 – 52
[Decline of Indian Handicraft in British Period]
(कम्पनी शासन से पूर्व हस्तशिल्प की स्थिति, यूरोपीय बाजारों में भारतीय वस्त्र, विदेशी बाजारों में भारतीय वस्त्रों पर प्रतिबन्ध, कम्पनी की आर्थिक नीति और भारतीय हस्तशिल्प का पतन, कम्पनी की नीतियों और भारतीय हस्तशिल्प, अन्य परंपरागत उद्योग-धन्धों का पतन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

5. कृषि का वाणिज्यीकरण और भारत पर इसका प्रभाव        … 53 – 59
[Commercialisation of Agriculture and its Impact on India]
(कृषि का वाणिज्यीकरण, कृषि के वाणिज्यीकरण का प्रभाव, कृषि उत्पादन में कमी, अकाल एवं भुखमरी, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

6. धन का बहिर्गमन/धन की निकासी का सिद्धान्त         … 60 – 66
[Theory of Drain of Wealth]
(कम्पनी की प्रारम्भिक विजय एवं धन निकासी का प्रसंग, धन निकासी एवं लॉर्ड क्लाइव का मत, धन निकासी एवं जॉन स्टेची का मत, दादाभाई नौरोजी एवं धन-निकासी संबंधी उनका मत, अन्य भारतीय विद्वानों के धन निकासी संबंधी मत, विदेशी पूँजी का निवेश विभिन्न क्षेत्रों में, पूँजीवाद का विकास, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

7. रेलवे का विकास और इसका प्रभाव               … 67 – 74
[Development of Railways and its Impact]
(भारत में रेलवे निर्माण के उद्देश्य, पुरातन गारंटी पद्धति 1844-1869 ई., पुरातन गारंटी अनुबन्ध की प्रमुख शर्तें, पुरातन गारंटी पद्धति और रेलवे का विकास, पुरातन गारंटी पद्धति के दोष,


(viii)

सरकार द्वारा रेलवे का विकास 1869-1882 ई., नवीन गारंटी पद्धति और 1900 ई. तक रेलवे का विकास, रेलवे के विकास के परिणाम, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

8. औपनिवेशिक काल में बैंकिंग प्रणाली का विकास         … 75 – 84
[Development of Banking System in Colonial Period]
(भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना से पूर्व बैंकिंग प्रणाली, आधुनिक बैंकिंग प्रणाली का विकास, प्रेसिडेन्सी बैंकों की स्थापना एवं उनका एकीकरण, भारत में व्यावसायिक बैंकों की स्थापना, भारत में विदेशी बैंकों का विकास, भारतीयों द्वारा बैंकों की स्थापना, डाकखाना बचत बैंकों की स्थापना, भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना, ब्रिटिश भारत में मौद्रिक प्रणाली, रुपया को मानक मुद्रा के रूप में मान्यता, रुपया के विनिमय मान दर का स्वर्णमान दर में निर्धारण, कागजी मुद्रा का प्रचलन, रुपयों के विनिमय दर का पाउंड स्टर्लिंग में निर्धारण, रिजर्व बैंक की स्थापना, भारत को अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सदस्यता, रुपये का प्रथम अवमूल्यन, मुद्रा प्रणाली में दशमलव प्रणाली का अनुकरण, रुपये का दूसरा अवमूल्यन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

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Description

भारत का सामाजिक-सांस्कृतिक एवं आर्थिक इतिहास-Socio-Cultural and Economic History of India

ISBN: 978-93-47520-47-1

विषय-सूची

अध्याय                         पृष्ठ

1200–1700 ई.

1. सल्तनत एवं मुगल काल के दौरान सामाजिक स्थिति         … 1 – 29
[Social Condition during Sultanate and Mughal Period]
(सल्तनत कालीन समाज, मुस्लिम समाज, हिन्दू समाज, सल्तनत काल (1200-1526 ई.) में सामाजिक स्थिति, सल्तनत काल में हिन्दुओं की स्थिति, मुगलकालीन समाज, मुस्लिम समाज, हिन्दू समाज, मुगल–काल (1526-1707 ई.) की सामाजिक स्थिति, मुगल काल में हिन्दुओं की स्थिति, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

2. अलाउद्दीन खिलजी की बाजार-नियंत्रण नीति एवं राजस्व प्रणाली   … 30 – 39
[Market Control Policy and Revenue System of Alauddin Khalji]
(आर्थिक सुधार, अलाउद्दीन खिलजी की बाजार-नियंत्रण नीति : बाजार-नियंत्रण नीति के कारण व उद्देश्य, बाजार-नियंत्रण नीति के लाभ, बाजार-नियंत्रण नीति के दोष, अलाउद्दीन खिलजी की भू-राजस्व व्यवस्था, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

3. भारत में भक्ति और सूफी आंदोलन : कारण एवं प्रमुख सिद्धान्त    … 40 – 74
[Bhakti and Sufism Movement in India : Causes and Main Principles]
(भक्ति-आंदोलन, भक्ति-आंदोलन का उद्भव, भक्ति-आंदोलन के उद्देश्य, भक्ति-आंदोलन के उदय के कारण, भक्ति-आंदोलन की विशेषताएँ, भक्ति-आंदोलन के प्रमुख सन्त एवं उनकी विचारधाराएँ, भक्ति-आंदोलन के प्रभाव, भारत में सूफी धर्म, ‘सूफी’ शब्द का अर्थ, सूफी मत का उद्गम, वहदत-उल-वुजूद का सिद्धान्त, सूफी धर्म के सिद्धान्त, सूफी सन्तों का उद्देश्य, खानकाह पद्धति, भारतीय समाज पर सूफी धर्म का प्रभाव, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

4. सल्तनत काल में महिलाओं की स्थिति              … 75 – 81
[Condition of Women during Sultanate Period]
(वेषभूषा, मनोरंजन के साधन, पर्दा प्रथा, विवाह प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह, सती प्रथा, जौहर प्रथा, दास प्रथा, स्त्री शिक्षा, निष्कर्ष, अभ्यासार्थ प्रश्न।)


(vi)

5. मुगल काल में भू-राजस्व व्यवस्था               … 82 – 92
[Land Revenue System during Mughal Period]
(अकबर एवं मुगल भू-राजस्व सुधार, राजस्व प्रशासन, केन्द्रीय स्तर पर राजस्व प्रशासन, प्रांतीय स्तर पर राजस्व प्रशासन, परगना स्तर पर राजस्व प्रशासन, ग्रामीण स्तर पर राजस्व प्रशासन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

6. मुगल काल में व्यापार एवं वाणिज्य              … 93 – 101
[Trade and Commerce during Mughal Period]
मुगलकालीन व्यापारिक-वाणिज्यिक वर्ग, व्यापार-वाणिज्य एवं राज्य की भूमिका, मुगल काल में विदेशी व्यापार एवं वाणिज्य, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

7. मुगल काल में बैंकिंग प्रणाली का विकास            … 102 – 108
[Development of Banking System during Mughal Period]
(सर्राफ वर्ग का उदय, हुंडी प्रणाली, हुंडी प्रणाली की कार्यपद्धति, हुंडियों के विभिन्न प्रकार, हुंडी प्रणाली में कटौती, सर्राफों की भूमिका, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

8. सल्तनत एवं मुगल काल में उद्योगों का विकास          … 109 – 124
[Development of Industries during Sultanate and Mughal Period]
(सल्तनत काल में विभिन्न उद्योग-धन्धों की स्थिति, ग्रामीण एवं शहरी आर्थिक व्यवस्था, शाही कारखाने व हस्त-कला, मुगल काल में कृषि, कृषि से सम्बन्धित ग्राम उद्योग, मूल्य, अकाल, अभ्यासार्थ प्रश्न।)


1700-1900 ई.

1. सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन             … 1 – 21
[Social and Religious Reformation Movement]
(भारतीय पुनर्जागरण के कारण, पुनर्जागरण का स्वरूप, पुनर्जागरण आन्दोलन के परिणाम, सामाजिक-धार्मिक आन्दोलन, राजा राममोहन राय व ब्रह्म समाज, स्वामी दयानन्द सरस्वती व आर्य समाज, स्वामी विवेकानन्द व रामकृष्ण मिशन, श्रीमती एनी बेसेंट और थियोसोफिकल सोसाइटी, अलीगढ़ आन्दोलन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

2. मुस्लिम समाज में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार         … 22 – 30
[Social and Religious Reforms in Muslim Society]
(सैयद अहमद बरेलवी और वहाबी आन्दोलन, मिर्जी गुलाम अहमद और अहमदिया आन्दोलन, देवबन्द आन्दोलन, प्रमुख मुस्लिम समाज सुधारक : सर सैयद अहमद खाँ एवं अलीगढ़ आन्दोलन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)


(vii)

3. औपनिवेशिक काल में भू-राजस्व प्रणालियाँ           … 31 – 45
(स्थायी बन्दोबस्त, महालवाड़ी एवं रैयतवाड़ी व्यवस्था)
[Land Revenue System during Colonial Period]
(Permanent Settlement, Mahalwari and Ryotwari System)
(लॉर्ड कार्नवालिस के भूमि-सुधार (स्थायी बन्दोबस्त), भूमि-सुधारों की आवश्यकता, स्थायी बन्दोबस्त से पूर्व की समस्याएँ, स्थायी बन्दोबस्त की विशेषताएँ अथवा कार्नवालिस के भूमि-सुधारों का स्वरूप, स्थायी बन्दोबस्त का समीक्षात्मक अध्ययन, स्थायी बन्दोबस्त के गुण अथवा लाभ, स्थायी बन्दोबस्त के दोष अथवा हानियाँ, महालवाड़ी पद्धति, मार्टिन बर्ड की भूकर व्यवस्था, महालवाड़ी व्यवस्था के गुण, महालवाड़ी व्यवस्था के अवगुण, रैयतवाड़ी पद्धति, रैयतवाड़ी व्यवस्था के लाभ, रैयतवाड़ी व्यवस्था के दोष, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

4. ब्रिटिश काल में भारतीय हस्तशिल्प का पतन           … 46 – 52
[Decline of Indian Handicraft in British Period]
(कम्पनी शासन से पूर्व हस्तशिल्प की स्थिति, यूरोपीय बाजारों में भारतीय वस्त्र, विदेशी बाजारों में भारतीय वस्त्रों पर प्रतिबन्ध, कम्पनी की आर्थिक नीति और भारतीय हस्तशिल्प का पतन, कम्पनी की नीतियों और भारतीय हस्तशिल्प, अन्य परंपरागत उद्योग-धन्धों का पतन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

5. कृषि का वाणिज्यीकरण और भारत पर इसका प्रभाव        … 53 – 59
[Commercialisation of Agriculture and its Impact on India]
(कृषि का वाणिज्यीकरण, कृषि के वाणिज्यीकरण का प्रभाव, कृषि उत्पादन में कमी, अकाल एवं भुखमरी, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

6. धन का बहिर्गमन/धन की निकासी का सिद्धान्त         … 60 – 66
[Theory of Drain of Wealth]
(कम्पनी की प्रारम्भिक विजय एवं धन निकासी का प्रसंग, धन निकासी एवं लॉर्ड क्लाइव का मत, धन निकासी एवं जॉन स्टेची का मत, दादाभाई नौरोजी एवं धन-निकासी संबंधी उनका मत, अन्य भारतीय विद्वानों के धन निकासी संबंधी मत, विदेशी पूँजी का निवेश विभिन्न क्षेत्रों में, पूँजीवाद का विकास, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

7. रेलवे का विकास और इसका प्रभाव               … 67 – 74
[Development of Railways and its Impact]
(भारत में रेलवे निर्माण के उद्देश्य, पुरातन गारंटी पद्धति 1844-1869 ई., पुरातन गारंटी अनुबन्ध की प्रमुख शर्तें, पुरातन गारंटी पद्धति और रेलवे का विकास, पुरातन गारंटी पद्धति के दोष,


(viii)

सरकार द्वारा रेलवे का विकास 1869-1882 ई., नवीन गारंटी पद्धति और 1900 ई. तक रेलवे का विकास, रेलवे के विकास के परिणाम, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

8. औपनिवेशिक काल में बैंकिंग प्रणाली का विकास         … 75 – 84
[Development of Banking System in Colonial Period]
(भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना से पूर्व बैंकिंग प्रणाली, आधुनिक बैंकिंग प्रणाली का विकास, प्रेसिडेन्सी बैंकों की स्थापना एवं उनका एकीकरण, भारत में व्यावसायिक बैंकों की स्थापना, भारत में विदेशी बैंकों का विकास, भारतीयों द्वारा बैंकों की स्थापना, डाकखाना बचत बैंकों की स्थापना, भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना, ब्रिटिश भारत में मौद्रिक प्रणाली, रुपया को मानक मुद्रा के रूप में मान्यता, रुपया के विनिमय मान दर का स्वर्णमान दर में निर्धारण, कागजी मुद्रा का प्रचलन, रुपयों के विनिमय दर का पाउंड स्टर्लिंग में निर्धारण, रिजर्व बैंक की स्थापना, भारत को अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सदस्यता, रुपये का प्रथम अवमूल्यन, मुद्रा प्रणाली में दशमलव प्रणाली का अनुकरण, रुपये का दूसरा अवमूल्यन, अभ्यासार्थ प्रश्न।)

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